नगरीय संरचना को समझने के लिए विकसित किए गए सबसे पहले और सबसे प्रभावशाली मॉडलों में से एक अर्नेस्ट बर्गेस (Ernest Burgess) द्वारा प्रस्तावित संकेंद्रित क्षेत्र मॉडल (Concentric Zone Model) है। यह मॉडल 1920 के दशक में शिकागो स्कूल के समाजशास्त्रियों द्वारा शिकागो शहर के विकास का अध्ययन करते हुए विकसित किया गया था। यह मॉडल मानव पारिस्थितिकी दृष्टिकोण पर आधारित है और यह समझाने का प्रयास करता है कि शहर केंद्रीय व्यापार जिले (CBD) के चारों ओर संकेंद्रित वृत्तों या "क्षेत्रों" की एक श्रृंखला में कैसे बढ़ते हैं और व्यवस्थित होते हैं।
मॉडल का वर्णन: बर्गेस के मॉडल के अनुसार, शहर एक केंद्रीय बिंदु से बाहर की ओर बढ़ते हुए पांच संकेंद्रित क्षेत्रों में विभाजित होते हैं, प्रत्येक की अपनी विशिष्ट सामाजिक और आर्थिक विशेषताएं होती हैं:
1. केंद्रीय व्यापार जिला (Central Business District - CBD) / क्षेत्र I:
- यह शहर का सबसे भीतरी वृत्त और केंद्र बिंदु है।
- इसमें मुख्य रूप से वाणिज्यिक गतिविधियाँ (दुकानें, कार्यालय, बैंक, थिएटर) और कुछ सबसे पुराने सरकारी भवन शामिल होते हैं।
- यहाँ आवासीय आबादी बहुत कम होती है, और दिन के समय कार्यबल की अधिकता होती है। यह शहर का सबसे सुलभ और महंगा क्षेत्र होता है।
2. संक्रमण क्षेत्र (Zone of Transition) / क्षेत्र II:
- CBD के ठीक बाहर स्थित यह क्षेत्र व्यावसायिक और आवासीय उपयोग का मिश्रण होता है।
- यह उच्च गतिशीलता वाला क्षेत्र है जहाँ पुराने और जीर्ण-शीर्ण आवासीय भवन पाए जाते हैं, जिन्हें अक्सर कारखानों, गोदामों और छोटे व्यवसायों द्वारा अतिक्रमण कर लिया जाता है।
- यह क्षेत्र अक्सर गरीबी, सामाजिक समस्याओं (अपराध, वेश्यावृत्ति), और सामाजिक विघटन की उच्च दर से जुड़ा होता है।
- यह आप्रवासी समूहों का पहला पड़ाव होता है, जो शहर में आते ही यहां बस जाते हैं, कम किराए और CBD के करीब रोजगार के अवसरों के कारण। जैसे-जैसे नए आप्रवासी आते हैं, पुराने आप्रवासी समूह बाहर के क्षेत्रों में चले जाते हैं।
3. श्रमिक वर्ग के आवास क्षेत्र (Zone of Workingmen's Homes) / क्षेत्र III:
- यह संक्रमण क्षेत्र के बाहर स्थित है और उन श्रमिकों के आवासों की विशेषता है जिन्होंने संक्रमण क्षेत्र से बाहर निकलने और बेहतर रहने की स्थिति प्राप्त करने में कामयाबी हासिल की है।
- यह स्थिर, मध्यम-आय वाले, श्रमिक वर्ग के परिवारों का क्षेत्र है, जो आमतौर पर पुराने लेकिन अच्छी तरह से रखे गए घरों में रहते हैं।
- यहाँ सामाजिक स्थिरता संक्रमण क्षेत्र की तुलना में अधिक होती है।
4. आवासीय क्षेत्र (Residential Zone) / क्षेत्र IV:
- श्रमिक वर्ग के आवास क्षेत्र के बाहर यह क्षेत्र मध्यम-वर्ग के बड़े और अधिक महंगे घरों से बना होता है।
- यह उच्च सामाजिक स्थिति, बेहतर गुणवत्ता वाले आवास और अधिक उपनगरीय चरित्र की विशेषता है।
- इसमें अक्सर एकल-परिवार के घर और कुछ अपार्टमेट्स शामिल होते हैं, जिनमें अधिक जगह और खुली जगह होती है।
5. यातायात क्षेत्र या कम्यूटर जोन (Commuter Zone) / क्षेत्र V:
- यह शहर का सबसे बाहरी वृत्त है, जो उपनगरीय समुदायों या "यातायात कस्बों" से बना होता है।
- यहां के निवासी काम के लिए CBD या अन्य नगरीय क्षेत्रों में आते-जाते हैं।
- यह निम्न घनत्व वाले आवास, बड़े घरों और शहर के केंद्र से दूरी के कारण अपेक्षाकृत शांत और ग्रामीण वातावरण की विशेषता है।
- यहाँ के निवासी अक्सर नगरीय केंद्र से सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से अलग महसूस करते हैं।
मॉडल के अंतर्निहित सिद्धांत: बर्गेस का मॉडल इस विचार पर आधारित था कि शहर एक पारिस्थितिक प्रक्रिया के माध्यम से बढ़ते हैं, जिसे "आक्रमण, वर्चस्व और उत्तराधिकार" (invasion, dominance, and succession) के रूप में जाना जाता है। जैसे-जैसे शहर का केंद्र फैलता है, आस-पास के क्षेत्र पर "आक्रमण" करता है, जिससे मौजूदा आबादी आगे धकेल दी जाती है। यह एक निरंतर प्रक्रिया है जहाँ एक क्षेत्र का उपयोग दूसरे क्षेत्र में फैल जाता है, जिससे नगरीय पैटर्न में बदलाव आता है।
आलोचनात्मक मूल्यांकन:
संकेंद्रित क्षेत्र मॉडल नगरीय समाजशास्त्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था, लेकिन यह कई आलोचनाओं का भी विषय रहा है:
1. अत्यधिक सामान्यीकरण और अनुभवजन्य अपर्याप्तता:
- एकल केंद्र का पूर्वाग्रह: यह मॉडल केवल उन शहरों पर लागू होता है जिनमें एक स्पष्ट केंद्रीय व्यापार जिला होता है और जो एक ही केंद्र से बाहर की ओर बढ़ते हैं। आधुनिक शहर अक्सर बहु-केंद्रित होते हैं, जिनमें कई व्यावसायिक केंद्र और उपनगर होते हैं, जिससे यह मॉडल अप्रासंगिक हो जाता है।
- शिकागो-केंद्रित: मॉडल मुख्य रूप से शिकागो शहर के अनुभव पर आधारित था, जो 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में तेजी से बढ़ रहा था। यह अन्य शहरों, विशेष रूप से यूरोप, एशिया या लैटिन अमेरिका के शहरों पर सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं होता है, जिनकी अपनी अनूठी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक विकास पैटर्न होते हैं।
- भौगोलिक बाधाओं की उपेक्षा: मॉडल भौगोलिक बाधाओं जैसे झीलें, नदियाँ या पहाड़ की उपेक्षा करता है जो शहर के विकास को वृत्ताकार पैटर्न से विचलित कर सकते हैं।
2. सामाजिक और सांस्कृतिक कारकों की उपेक्षा:
- जातीय और वर्ग जटिलता: मॉडल जातीय और वर्ग समूहों की जटिलता को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता है। जबकि यह आप्रवासी समूहों के संक्रमण क्षेत्र में बसने की बात करता है, यह जातीय एन्क्लेव या सामाजिक स्तरीकरण के आंतरिक गतिशीलता को गहराई से नहीं खोजता है।
- व्यक्तिगत पसंद और एजेंसी की अनदेखी: मॉडल यह मानता है कि व्यक्ति पूरी तरह से पर्यावरणीय दबावों से निर्धारित होते हैं और उनके पास अपने आवास विकल्पों या जीवन शैली में बहुत कम एजेंसी होती है। यह व्यक्तिगत पसंद, सांस्कृतिक मूल्यों और राजनीतिक निर्णयों की भूमिका को कम आंकता है।
3. आर्थिक और राजनीतिक शक्ति संबंधों की उपेक्षा:
- मॉडल नगरीय विकास में आर्थिक और राजनीतिक शक्ति संबंधों की भूमिका की उपेक्षा करता है। यह यह नहीं बताता कि कौन नगरीय भूमि का स्वामित्व रखता है, कौन नगरीय विकास का निर्णय लेता है, या कौन लाभान्वित होता है।
- पूंजीवादी भू-उपयोग पैटर्न, सरकार की नीतियां, और रियल एस्टेट बाजार की गतिशीलता नगरीय संरचना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसकी बर्गेस के मॉडल में पर्याप्त व्याख्या नहीं की गई है।
4. समय के साथ परिवर्तनशीलता की कमी:
- यह मॉडल गतिशील नहीं है; यह समय के साथ शहर के विकास और परिवर्तन की प्रक्रिया को पर्याप्त रूप से नहीं दर्शाता है। शहर स्थिर संस्थाएं नहीं हैं; वे लगातार बदल रहे हैं, और मॉडल इन परिवर्तनों को पकड़ने में विफल रहता है।
- शहरी नवीनीकरण, जेंट्रिफिकेशन, और उपनगरीकरण के बाद के पैटर्न इस मॉडल के फ्रेमवर्क में अच्छी तरह से फिट नहीं होते हैं।
5. अन्य मॉडलों का उदय:
- संकेंद्रित क्षेत्र मॉडल की सीमाओं के जवाब में, होमर हॉयट (Homer Hoyt) का सेक्टर मॉडल (Sector Model) और सी.डी. हैरिस (C.D. Harris) और एडवर्ड उलमैन (Edward Ullman) का बहु-नाभिकीय मॉडल (Multiple Nuclei Model) जैसे वैकल्पिक मॉडल विकसित किए गए। सेक्टर मॉडल ने परिवहन मार्गों के साथ नगरीय विकास के अक्षीय पैटर्न पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि बहु-नाभिकीय मॉडल ने स्वीकार किया कि कई बड़े शहरों में कई कार्यात्मक केंद्र होते हैं।
निष्कर्ष: संकेंद्रित क्षेत्र मॉडल नगरीय समाजशास्त्र में एक महत्वपूर्ण शुरुआती प्रयास था जिसने नगरीय संरचना को समझने के लिए एक सरल लेकिन शक्तिशाली रूपरेखा प्रदान की। इसने नगरीय नियोजन और अनुसंधान के लिए एक प्रारंभिक बिंदु के रूप में कार्य किया। हालांकि, इसकी कई सीमाएँ हैं, विशेष रूप से इसकी अनुभवजन्य अपर्याप्तता, सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक कारकों की उपेक्षा, और आधुनिक शहरों की जटिलता को पकड़ने में इसकी अक्षमता। इन आलोचनाओं के बावजूद, यह मॉडल नगरीय समाजशास्त्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और हमें यह समझने में मदद करता है कि शुरुआती 20वीं सदी के पश्चिमी शहरों को कैसे समझा गया था। यह इस बात पर भी जोर देता है कि नगरीय संरचना को समझने के लिए अधिक व्यापक और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो विभिन्न ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संदर्भों को ध्यान में रखे।
Subscribe on YouTube - NotesWorld
For PDF copy of Solved Assignment
Any University Assignment Solution
