शिक्षा की समझ के प्रति उत्तर आधुनिकतावादी सैद्धांतिक उपागम
उत्तर आधुनिकतावाद बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में विकसित हुए दार्शनिक विचारों का एक जटिल और विविध समूह है, जो आधुनिकतावादी विचारों, विशेष रूप से सार्वभौमिक सत्य, उद्देश्य ज्ञान और प्रगति के ग्रैंड नैरेटिव (बृहत् आख्यान) पर सवाल उठाता है। शिक्षा के क्षेत्र में, उत्तर आधुनिकतावादी उपागमों ने पारंपरिक शैक्षणिक प्रणालियों, पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों की आलोचना की है, और ज्ञान, शक्ति और पहचान के बारे में नए तरीकों से सोचने का प्रस्ताव दिया है।
उत्तर आधुनिकतावाद के प्रमुख सिद्धांतकार जैसे मिशेल फूको, जाक डेरिडा, जाक लैकन और ज्यां-फ्रांस्वा ल्योटार्ड ने शिक्षा के पारंपरिक दृष्टिकोणों को चुनौती दी है।
उत्तर आधुनिकतावाद की मुख्य अवधारणाएँ और उनका शिक्षा पर प्रभाव:
1. ग्रैंड नैरेटिव्स (बृहत् आख्यानों) का विघटन (Deconstruction of Grand Narratives):
- अवधारणा: उत्तर आधुनिकतावाद सार्वभौमिक सत्यों, प्रगति के विचारों, मुक्ति या प्रबुद्धता जैसे बड़े आख्यानों को अस्वीकार करता है जो आधुनिकता के केंद्र में थे। ये आख्यान अक्सर शक्ति संरचनाओं को वैधता प्रदान करते हैं और विविधता को दबाते हैं।
- शिक्षा पर प्रभाव: पारंपरिक शिक्षा अक्सर ज्ञान के एक विशेष, पश्चिमी-केंद्रित या प्रभुत्वशाली दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है। उत्तर आधुनिकतावादी शिक्षा इन "एकल सत्यों" पर सवाल उठाती है, विभिन्न ज्ञान प्रणालियों, विश्वदृष्टि और परिप्रेक्ष्यों की वैधता को स्वीकार करती है। यह मानता है कि कोई एक "सर्वश्रेष्ठ" शैक्षिक मॉडल या पाठ्यक्रम नहीं है।
2. ज्ञान और शक्ति का संबंध (Relationship between Knowledge and Power):
- अवधारणा: मिशेल फूको ने जोर दिया कि ज्ञान तटस्थ नहीं है, बल्कि यह हमेशा शक्ति संबंधों से जुड़ा होता है। कौन क्या जानता है, और किसे ज्ञान माना जाता है, यह शक्ति संरचनाओं द्वारा निर्धारित होता है।
- शिक्षा पर प्रभाव: शिक्षा संस्थानों को अब ज्ञान के तटस्थ वितरक के रूप में नहीं देखा जाता है, बल्कि उन स्थलों के रूप में देखा जाता है जहां शक्ति और नियंत्रण का अभ्यास किया जाता है। पाठ्यक्रम, मूल्यांकन विधियां और शिक्षण शैलियाँ सभी शक्ति के अभ्यास के तरीके हो सकते हैं। उत्तर आधुनिकतावादी उपागम शिक्षा में "छुपे हुए पाठ्यक्रम" (hidden curriculum) की जांच करते हैं जो अनजाने में विशिष्ट मूल्यों और दृष्टिकोणों को सुदृढ़ करता है।
3. बहुलता, भिन्नता और पहचान (Plurality, Difference, and Identity):
- अवधारणा: उत्तर आधुनिकतावाद भिन्नता का जश्न मनाता है और जोर देता है कि पहचान द्रव और खंडित होती है, न कि स्थिर और एकल। यह व्यक्तिगत अनुभवों, आवाज़ों और हाशिए पर पड़े समूहों के परिप्रेक्ष्यों को महत्व देता है।
- शिक्षा पर प्रभाव: शिक्षा को अब छात्रों को एकरूप बनाने का प्रयास नहीं करना चाहिए, बल्कि उनकी अद्वितीय पहचान, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और अनुभवों को पहचानना और उनका सम्मान करना चाहिए। यह समावेशी शिक्षा, बहुसांस्कृतिक शिक्षा और विभिन्न सीखने की शैलियों को समायोजित करने पर जोर देता है। शिक्षकों को छात्रों की विविध आवश्यकताओं और पृष्ठभूमि के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।
4. विखंडन (Deconstruction):
- अवधारणा: जाक डेरिडा द्वारा विकसित, विखंडन एक पाठ या अवधारणा में अंतर्निहित विरोधाभासों, पदानुक्रमों और अनुपस्थित आवाज़ों को प्रकट करने का एक तरीका है। इसका उद्देश्य निश्चित अर्थों को चुनौती देना है।
- शिक्षा पर प्रभाव: शिक्षा में, विखंडन का उपयोग पाठ्यक्रम सामग्री, पाठ्यपुस्तकों और शैक्षणिक सिद्धांतों का विश्लेषण करने के लिए किया जा सकता है ताकि उनमें निहित पूर्वाग्रहों, मान्यताओं और बहिष्करणों को उजागर किया जा सके। यह छात्रों को आलोचनात्मक सोच विकसित करने और ज्ञान के विभिन्न स्रोतों पर सवाल उठाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
5. भाषा की भूमिका (Role of Language):
- अवधारणा: उत्तर आधुनिकतावाद भाषा को वास्तविकता के एक सरल प्रतिबिंब के रूप में नहीं देखता है, बल्कि वास्तविकता के निर्माण में एक सक्रिय शक्ति के रूप में देखता है। अर्थ स्थिर नहीं हैं, बल्कि वे संदर्भ और व्याख्या पर निर्भर करते हैं।
- शिक्षा पर प्रभाव: शिक्षा में भाषा के महत्व पर जोर दिया जाता है, यह पहचानते हुए कि भाषा ज्ञान, पहचान और शक्ति को कैसे आकार देती है। यह छात्रों को भाषा का आलोचनात्मक विश्लेषण करने, विभिन्न प्रवचनों को समझने और प्रभावी ढंग से संवाद करने के लिए सशक्त बनाता है।
6. अनुभव और व्यक्तिपरकता (Experience and Subjectivity):
- अवधारणा: वस्तुनिष्ठ, सार्वभौमिक ज्ञान की अस्वीकृति के साथ, व्यक्तिपरक अनुभव और व्यक्तिगत दृष्टिकोण शिक्षा में अधिक केंद्रीय हो जाते हैं।
- शिक्षा पर प्रभाव: यह छात्र-केंद्रित सीखने पर अधिक जोर देता है, जहां छात्र के अनुभव और रुचि सीखने की प्रक्रिया को आकार देती है। शिक्षक सुविधादाता बन जाते हैं जो छात्रों को अपने अनुभवों से अर्थ निकालने और अपने स्वयं के ज्ञान का निर्माण करने में मदद करते हैं।
उत्तर आधुनिकतावादी उपागमों की आलोचना और सीमाएँ:
हालांकि उत्तर आधुनिकतावादी उपागमों ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान की है, उनकी कुछ आलोचनाएँ भी हैं:
- सापेक्षवाद का आरोप (Accusation of Relativism): आलोचकों का तर्क है कि सभी सत्यों और ज्ञान प्रणालियों को समान रूप से वैध मानने से पूर्ण सापेक्षवाद हो सकता है, जिससे किसी भी ज्ञान को मूल्यहीन या अप्रमाणिक ठहराया जा सकता है।
- संरचना का अभाव (Lack of Structure): उत्तर आधुनिकतावाद को अक्सर एक सुसंगत ढाँचे या दिशा की कमी के लिए आलोचना की जाती है, जिससे शैक्षणिक प्रथाओं में भ्रम या असंगति हो सकती है।
- व्यवहार्यता की कमी (Lack of Practicality): कुछ लोग मानते हैं कि उत्तर आधुनिकतावादी विचार आकर्षक होते हुए भी, उन्हें ठोस शैक्षणिक रणनीतियों या पाठ्यक्रम डिजाइन में लागू करना मुश्किल हो सकता है।
- नकारात्मकता पर जोर (Emphasis on Negativity): उत्तर आधुनिकतावाद को अक्सर विनाशकारी या नकारात्मक होने के लिए आलोचना की जाती है, क्योंकि यह मौजूदा संरचनाओं और विचारों पर सवाल उठाता है लेकिन अक्सर वैकल्पिक समाधान प्रदान नहीं करता है।
निष्कर्ष:
शिक्षा की समझ के प्रति उत्तर आधुनिकतावादी सैद्धांतिक उपागमों ने शिक्षा के पारंपरिक दृष्टिकोणों को महत्वपूर्ण रूप से चुनौती दी है। उन्होंने हमें ज्ञान, शक्ति, पहचान और विविधता के बीच संबंधों के बारे में अधिक आलोचनात्मक रूप से सोचने के लिए मजबूर किया है। जबकि उनकी अपनी सीमाएँ और आलोचनाएँ हैं, उन्होंने शिक्षा को अधिक समावेशी, न्यायसंगत और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए महत्वपूर्ण विचार प्रदान किए हैं, जो छात्रों को एक जटिल और बहुसांस्कृतिक दुनिया में नेविगेट करने के लिए तैयार करते हैं। यह शिक्षाविदों को यह सोचने के लिए प्रोत्साहित करता है कि ज्ञान का निर्माण कैसे होता है, कौन इसका लाभार्थी है, और हम एक ऐसी शिक्षा प्रणाली कैसे बना सकते हैं जो सभी के लिए अधिक सशक्त और प्रासंगिक हो।
Subscribe on YouTube - NotesWorld
For PDF copy of Solved Assignment
Any University Assignment Solution
