दूरसंचार क्या है?
दूरसंचार (Telecommunication) वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी स्थान से दूसरे स्थान तक सूचना या डेटा का आदान-प्रदान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति, स्थान या उपकरण से दूसरे व्यक्ति, स्थान या उपकरण तक सूचना पहुँचाना होता है, बिना शारीरिक रूप से उपस्थित हुए। दूरसंचार का क्षेत्र बेहद विस्तृत है, जिसमें संचार नेटवर्क, सिस्टम, और तकनीकी उपकरण शामिल होते हैं, जो सूचना के आदान-प्रदान को आसान और प्रभावी बनाते हैं। यह आज के डिजिटल युग का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, और इसका उपयोग व्यवसाय, शिक्षा, संचार, स्वास्थ्य, मनोरंजन और अन्य क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है।
दूरसंचार की मूलभूत अवधारणाएँ
दूरसंचार की प्रणाली में कई तकनीकी घटक होते हैं जो मिलकर काम करते हैं। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण अवधारणाएँ निम्नलिखित हैं:
1. संचार माध्यम (Transmission Medium)
दूरसंचार प्रणाली में संचार माध्यम वह तरीका होता है जिसके द्वारा सूचना एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचती है। संचार माध्यम के बिना कोई भी संप्रेषण संभव नहीं है। ये माध्यम दो प्रकार के होते हैं:
तार आधारित माध्यम (Wired Medium):
- इसमें कॉपर वायर (Copper Wire), ऑप्टिकल फाइबर (Optical Fiber), और कोक्सियल केबल (Coaxial Cable) जैसे माध्यमों का उपयोग किया जाता है। ऑप्टिकल फाइबर तारों में डेटा की गति तेज़ होती है और यह दूरी पर भी बिना किसी रुकावट के सूचना भेजने में सक्षम होते हैं।
ताररहित माध्यम (Wireless Medium):
- यह माध्यम राडियो वेव्स, माइक्रोवेव, इन्फ्रारेड, और सेटेलाइट सिग्नल्स के माध्यम से काम करता है। वायरलेस नेटवर्क, जैसे Wi-Fi, Bluetooth, और मोबाइल नेटवर्क (3G, 4G, 5G) इस श्रेणी में आते हैं। यह संचार अत्यधिक लचीला होता है क्योंकि इसमें तारों की आवश्यकता नहीं होती।
2. संचार प्रणाली (Communication System)
दूरसंचार में संचार प्रणाली वह संरचना होती है, जो डेटा या सूचना को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक पहुँचाने के लिए डिजाइन की जाती है। इसमें मुख्यतः तीन घटक होते हैं:
- स्रोत (Source): यह वह बिंदु है जहाँ से डेटा उत्पन्न होता है। यह एक कम्प्यूटर, स्मार्टफोन, या अन्य उपकरण हो सकता है, जो संदेश उत्पन्न करता है।
- चरण (Transmitter): यह वह उपकरण है, जो डेटा को एक कूट संकेत (modulated signal) में बदलता है और उसे संचार माध्यम (Transmission Medium) के माध्यम से भेजता है। ट्रांसमीटर उदाहरण के रूप में रेडियो और टेलीविजन के ट्रांसमीटर होते हैं।
- स्वीकारकर्ता (Receiver): यह वह उपकरण है जो संदेश या सूचना को प्राप्त करता है। यह सिग्नल को फिर से मूल डेटा (demodulated signal) में परिवर्तित करता है और उपयोगकर्ता को समझने योग्य बनाता है।
3. बैंडविड्थ (Bandwidth)
बैंडविड्थ वह मात्रा होती है, जो यह निर्धारित करती है कि एक संचार चैनल पर एक निश्चित समय में कितनी सूचना या डेटा ट्रांसमिट किया जा सकता है। बैंडविड्थ की अधिकता का अर्थ है उच्च गति से डेटा का आदान-प्रदान। बैंडविड्थ को हर्ट्ज (Hz) में मापा जाता है, और यह जितना अधिक होता है, उतना अधिक डेटा एक समय में संचारित किया जा सकता है। उच्च बैंडविड्थ वाले नेटवर्क, जैसे ऑप्टिकल फाइबर या 5G नेटवर्क, तेज़ इंटरनेट गति और बेहतर संचार सुविधा प्रदान करते हैं।
4. प्रोटोकॉल (Protocol)
प्रोटोकॉल वह नियम और दिशा-निर्देश होते हैं जो संचार के दौरान डेटा के आदान-प्रदान को नियंत्रित करते हैं। प्रोटोकॉल यह सुनिश्चित करते हैं कि डेटा सही तरीके से भेजा जाए और सही तरीके से प्राप्त किया जाए। TCP/IP, HTTP, FTP, और SMTP प्रमुख प्रोटोकॉल हैं जो डेटा ट्रांसमिशन में उपयोग होते हैं। यह नियम सुनिश्चित करते हैं कि डेटा के पैकेट्स को सही क्रम में भेजा जाए, रुकावट से बचने के लिए पुनः प्रयास किया जाए, और प्राप्त करने वाले को डेटा सही रूप में मिले।
5. नेटवर्किंग (Networking)
नेटवर्किंग वह प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न कम्प्यूटर या उपकरण एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, ताकि वे आपस में डेटा या सूचना का आदान-प्रदान कर सकें। नेटवर्किंग की विभिन्न प्रकारें होती हैं:
- LAN (Local Area Network): यह एक छोटे क्षेत्र, जैसे घर या कार्यालय के भीतर उपकरणों को जोड़ता है।
- WAN (Wide Area Network): यह एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में उपकरणों को जोड़ता है, जैसे इंटरनेट।
- MAN (Metropolitan Area Network): यह एक शहर के भीतर नेटवर्क स्थापित करता है।
नेटवर्किंग से जुड़े उपकरणों में राउटर, स्विच, और हब शामिल हैं, जो डेटा को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में भेजने का कार्य करते हैं।
6. एन्क्रिप्शन (Encryption)
दूरसंचार में एन्क्रिप्शन वह प्रक्रिया होती है जिसमें डेटा को एक गुप्त कोड में बदल दिया जाता है ताकि इसे सुरक्षित रखा जा सके। इसका उद्देश्य संचार के दौरान डेटा की सुरक्षा करना और उसे अवैध रूप से पहुंचने से रोकना होता है। SSL/TLS प्रोटोकॉल इंटरनेट पर सुरक्षित संचार सुनिश्चित करने के लिए एन्क्रिप्शन तकनीक का उपयोग करते हैं। यह व्यक्तिगत डेटा, जैसे पासवर्ड और क्रेडिट कार्ड विवरण, को चोरी होने से बचाता है।
दूरसंचार के प्रकार
दूरसंचार का क्षेत्र बहुत विविध है, और इसमें कई प्रकार के संचार सेवाएँ और प्रणालियाँ शामिल हैं:
- वॉयस संचार: यह सबसे सामान्य प्रकार का दूरसंचार है, जिसमें फोन कॉल्स और वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) सेवाएँ जैसे Skype और WhatsApp का उपयोग किया जाता है।
- डेटा संचार: इसमें इंटरनेट, ई-मेल, और फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल (FTP) जैसी सेवाएँ शामिल होती हैं, जिनका उद्देश्य डेटा का आदान-प्रदान करना होता है।
- वीडियो संचार: इसमें वीडियो कॉल्स और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेवाएँ शामिल होती हैं, जैसे Zoom, Google Meet, और Skype।
निष्कर्ष
दूरसंचार आज के डिजिटल युग का अहम हिस्सा बन चुका है। यह न केवल व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि यह व्यवसाय, सरकार और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में भी अहम भूमिका निभाता है। दूरसंचार की प्रणालियाँ, जैसे नेटवर्किंग, संचार माध्यम, प्रोटोकॉल, और सुरक्षा, इन सभी घटकों को समझकर हम किसी भी दूरसंचार सेवा को बेहतर ढंग से उपयोग कर सकते हैं। समय के साथ दूरसंचार की तकनीक में सुधार हो रहा है, और नई तकनीकों जैसे 5G, IoT, और सैटेलाइट संचार के आने से यह और अधिक प्रभावी और तेज़ हो रहा है।
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