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डुत्रिम नामधारी लेखक की परिभाषा दीजिए। सी. सी. सी. में इसको कैसे उपकल्पित किया जाता है ?

डुत्रिम नामधारी लेखक की परिभाषा:

डुत्रिम नामधारी लेखक (Pseudonymous Author) वह लेखक होते हैं, जो अपने वास्तविक नाम के बजाय कृत्रिम या काल्पनिक नाम का उपयोग करते हैं। यह नाम एक छद्म नाम (Pseudonym) के रूप में काम करता है और लेखक का असली नाम आमतौर पर पाठकों से छिपा रहता है। लेखक इस नाम का चयन विभिन्न कारणों से कर सकते हैं, जैसे अपनी पहचान को गोपनीय रखना, सामाजिक, राजनीतिक या व्यक्तिगत कारणों से सुरक्षा की आवश्यकता, या फिर कोई विशिष्ट साहित्यिक उद्देश्य (जैसे, लेखक की रचनाओं का अलग पहचान मिलना)।

डुत्रिम नामधारी लेखक एक तरह से अपनी रचनाओं के लिए एक अलग पहचान हासिल करते हैं, और यह पहचान उनके साहित्यिक कार्यों से जुड़ी रहती है। कुछ लेखक अपनी कृतियों को सामाजिक दबाव या पारिवारिक कारणों से छद्म नाम से प्रकाशित करते हैं, जबकि कुछ लेखक अपनी रचनाओं में अपनी शैली या विचारधारा को अन्यथा प्रस्तुत करने के लिए भी डुत्रिम नाम का उपयोग करते हैं। यह नाम किसी भी व्यक्ति के असली नाम से भिन्न हो सकता है, और आमतौर पर यह उनके व्यक्तित्व से पूरी तरह से अलग होता है।

उदाहरण के तौर पर, प्रसिद्ध लेखक मार्क ट्वेन का असली नाम सैम्यूल क्लेमेंस था, और जॉर्ज ऑरवेल का असली नाम एरिक आर्थर ब्लेयर था। यह लेखक अपने वास्तविक नाम के बजाय अपने छद्म नाम से अधिक प्रसिद्ध हुए।

सी. सी. सी. में डुत्रिम नामधारी लेखक का उपकल्पन:

Colon Classification (सी. सी. सी.) में डुत्रिम नामधारी लेखक की जानकारी को सही तरीके से वर्गीकृत और उपकल्पित (subordinate) किया जाता है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि किसी विशेष लेखक का वास्तविक नाम क्या है और उनका डुत्रिम नाम क्या है। सी. सी. सी. में डुत्रिम नामधारी लेखक की पहचान को इस प्रकार मान्यता दी जाती है:

  1. मुख्य प्रविष्टि (Main Entry) में डुत्रिम नाम का प्रयोग किया जाता है। डुत्रिम नामधारी लेखक के लिए, इस नाम को मुख्य प्रविष्टि में रखा जाता है, क्योंकि यह वही नाम होता है जिसके द्वारा वह लेखक पहचाना जाता है।
  2. इतर प्रविष्टि (Added Entry) में लेखक का असली नाम भी दिया जाता है। यदि लेखक का डुत्रिम नाम और वास्तविक नाम दोनों ही प्रमुख हैं, तो मुख्य प्रविष्टि में डुत्रिम नाम आता है और इतर प्रविष्टि में उनके असली नाम का उल्लेख किया जाता है।
  3. उपयुक्त संकेत (Appropriate Notation): सी. सी. सी. में डुत्रिम नामधारी लेखक के नाम को विशेष रूप से ब्रैकेट या किसी अन्य संकेत के साथ जोड़ा जाता है, जो यह स्पष्ट करता है कि यह नाम एक छद्म नाम है। इस प्रक्रिया से पाठक या शोधकर्ता यह आसानी से पहचान सकते हैं कि नाम वास्तविक नहीं है और इसके साथ कोई अतिरिक्त जानकारी या असली नाम जुड़ा हो सकता है।
  4. संदर्भ नोट्स (Reference Notes): डुत्रिम नामधारी लेखक के नाम के साथ, सूची में एक संदर्भ नोट दिया जाता है, जिसमें यह उल्लेख किया जाता है कि यह नाम एक छद्म नाम है और लेखक का असली नाम क्या है। इससे पुस्तकालय कर्मचारियों और शोधकर्ताओं को लेखक की सही पहचान करने में मदद मिलती है।

उदाहरण:

यदि कोई लेखक सैम्यूल क्लेमेंस (Mark Twain) छद्म नाम से लिखता है, तो सी. सी. सी. में इस प्रकार उपकल्पित किया जा सकता है:

  • मुख्य प्रविष्टि: Twain, Mark
    (डुत्रिम नाम के रूप में)
  • इतर प्रविष्टि: Clemens, Samuel L.
    (असली नाम)

इस तरह, सी. सी. सी. प्रणाली में डुत्रिम नामधारी लेखकों को उपकल्पित करने से उनकी दोनों पहचानें (असली और डुत्रिम नाम) स्पष्ट रूप से संरचित होती हैं और उपयोगकर्ता को सही जानकारी प्राप्त होती है। इस पद्धति से यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी दस्तावेज़ को उनके सही लेखक से जोड़ा जा सके, चाहे वह छद्म नाम से लिखा गया हो या असली नाम से।

निष्कर्ष:

डुत्रिम नामधारी लेखक वह लेखक होते हैं, जो अपने असली नाम के बजाय काल्पनिक नाम का उपयोग करते हैं। सी. सी. सी. में इस प्रक्रिया को उपकल्पित किया जाता है, ताकि दोनों नामों की स्पष्टता बनी रहे और पुस्तकालय में वर्गीकरण के दौरान सही जानकारी प्रदान की जा सके। यह विधि पुस्तकालयों में पुस्तक या दस्तावेज़ के सही लेखक की पहचान सुनिश्चित करती है, चाहे लेखक ने छद्म नाम से लिखा हो।

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