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अंकन को परिभाषित कीजिए | यू. डी. सी. में इनके प्रयोग की सोदाहरण व्याख्या कीजिए |

अंकन (Notation) की परिभाषा:

अंकन एक संकेत प्रणाली है, जिसका उद्देश्य किसी जानकारी, सामग्री या डेटा को एक विशिष्ट, सरल और व्यवस्थित रूप में प्रदर्शित करना होता है। यह विशेष रूप से तब उपयोगी होता है जब किसी बड़ी जानकारी को संक्षिप्त, व्यवस्थित और संरचित रूप में प्रस्तुत किया जाता है ताकि उसे समझना और पुनः प्राप्त करना आसान हो। अंकन का उपयोग न केवल गणित, विज्ञान और भाषा के क्षेत्रों में किया जाता है, बल्कि वर्गीकरण प्रणालियों, पुस्तकालयों, आधिकारिक दस्तावेज़ों, और सूचना प्रबंधन में भी किया जाता है। अंकन का मुख्य उद्देश्य है किसी भी वस्तु, विचार या सूचना को एक चिन्ह या प्रतीक के माध्यम से प्रदर्शित करना।

अंकन को समझने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि इसे एक प्रकार की संकेत प्रणाली के रूप में देखा जाए, जो किसी जानकारी को सरल, सटीक और व्यवस्थित रूप में दर्शाता है। उदाहरण के तौर पर, संख्याएं, सिद्धांत के प्रतीक या वर्गीकरण प्रणाली के कोड अंकन के रूप में कार्य करते हैं। अंकन के द्वारा डेटा को एक निश्चित पैटर्न या क्रम में रखा जाता है, जिससे जानकारी की पुनः प्राप्ति में आसानी होती है।

यू. डी. सी. (Universal Decimal Classification) में अंकन का प्रयोग:

यू. डी. सी. (Universal Decimal Classification) एक पुस्तकालय वर्गीकरण प्रणाली है जिसे पॉलोट और रोट ने विकसित किया था। यह प्रणाली किताबों और दस्तावेज़ों को संख्यात्मक अंकन (numerical notation) के माध्यम से वर्गीकृत करती है, ताकि उपयोगकर्ता आसानी से अपनी ज़रूरत की जानकारी को ढूँढ सकें। यू. डी. सी. में अंकन को एक संकेत प्रणाली के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो कि विभिन्न विषय श्रेणियों के लिए विशिष्ट संख्यात्मक कोड प्रदान करता है।

यू. डी. सी. अंकन प्रणाली में, हर एक विषय के लिए एक विशिष्ट अंकन संख्या (notation) दी जाती है। इन संख्याओं में कोड, संपूर्ण अंक (digit), और संपूर्ण बिंदुओं (decimal points) का उपयोग होता है। यह अंकन प्रणाली बहु-स्तरीय होती है, जहां एक विषय को कई उपवर्गों और श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। यू. डी. सी. में अंकन का प्रयोग विषयों की पहचान, उनके वर्गीकरण और संग्रहण को सुव्यवस्थित करने के लिए किया जाता है।

यू. डी. सी. में अंकन के प्रयोग की व्याख्या:

यू. डी. सी. में अंकन प्रणाली को एक प्रकार से विषय आधारित रचनात्मक संख्या (subject-based numerical construction) के रूप में देखा जा सकता है। इसमें प्रत्येक श्रेणी और उपश्रेणी को अंकित करने के लिए एक विशेष संख्या कोड (numerical code) दिया जाता है। यह अंकन संख्या में दशमलव बिंदु का प्रयोग किया जाता है, जो कि प्रमुख विषय और उपविषय के बीच विभाजन करता है।

उदाहरण के लिए, यदि हम भौतिकी (Physics) के विषय को यू. डी. सी. के अंतर्गत वर्गीकृत करना चाहते हैं, तो भौतिकी के लिए अंकन होगा 53। यदि हमें भौतिकी के तहत वैज्ञानिक उपकरणों (Scientific Instruments) का वर्गीकरण करना है, तो इसका अंकन 53.07 होगा। यहाँ पर 53 भौतिकी का अंकन है, और .07 वैज्ञानिक उपकरणों का अंकन है। इसी प्रकार, यह अंकन प्रणाली विस्तृत विषयों के लिए इस्तेमाल की जाती है और प्रत्येक उपविषय को एक अलग संख्या आवंटित की जाती है।

यू. डी. सी. में अंकन के उदाहरण:

1. भौतिकी (Physics): भौतिकी के लिए अंकन 53 दिया गया है। अगर इस विषय के तहत हम कण भौतिकी (Particle Physics) का वर्गीकरण करना चाहते हैं, तो इसका अंकन 53.1 होगा। इसी प्रकार, क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics) के लिए अंकन 53.2 होगा।

  • 53 → भौतिकी (Physics)
  • 53.1 → कण भौतिकी (Particle Physics)
  • 53.2 → क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics)

2. जीवविज्ञान (Biology): जीवविज्ञान के लिए अंकन 57 है। यदि हम इसके भीतर जैविक विकास (Biological Evolution) का वर्गीकरण करें, तो इसका अंकन 57.1 होगा।

  • 57 → जीवविज्ञान (Biology)
  • 57.1 → जैविक विकास (Biological Evolution)

3. संरचनात्मक रसायन (Structural Chemistry): रसायनशास्त्र में विभिन्न शाखाओं का वर्गीकरण अंकन के माध्यम से किया जाता है। संरचनात्मक रसायन (Structural Chemistry) के लिए अंकन 54.1 होगा।

  • 54 → रसायनशास्त्र (Chemistry)
  • 54.1 → संरचनात्मक रसायन (Structural Chemistry)

यू. डी. सी. में अंकन के लाभ:

  1. संगठन और संरचना: यू. डी. सी. प्रणाली में अंकन की व्यवस्था बहुत ही व्यवस्थित होती है। प्रत्येक विषय, उपविषय और शाखा के लिए एक विशिष्ट अंकन होता है, जिससे पुस्तकालयों और सूचना केंद्रों में सामग्री का वर्गीकरण बहुत ही सुव्यवस्थित और संरचित होता है। यह उपयोगकर्ता को जल्दी और सटीक रूप से जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है।
  2. विस्तार की लचीलापन: यू. डी. सी. अंकन प्रणाली में यह लचीलापन है कि जैसे-जैसे नए विषयों या उपविषयों का विकास होता है, उन्हें नई संख्या आवंटित की जा सकती है। यह अंकन प्रणाली नए विचारों, शोधों और विकासों के आधार पर निरंतर अपडेट हो सकती है।
  3. सामान्यीकरण: यू. डी. सी. का अंकन एक अंतर्राष्ट्रीय मानक के रूप में कार्य करता है। इसका उपयोग दुनिया भर के पुस्तकालयों और सूचना केंद्रों में किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि विभिन्न देशों में समान विषयों के लिए समान अंकन उपयोग में लाए जाएं, जिससे सूचना के आदान-प्रदान में सरलता रहती है।
  4. विषय और सामग्री की आसानी से पुनः प्राप्ति: अंकन के द्वारा, किसी भी विशेष विषय, उपविषय या शाखा की सामग्री को आसानी से ढूँढा जा सकता है। जब किसी पुस्तकालय में यू. डी. सी. का अंकन किया जाता है, तो उपयोगकर्ताओं को केवल विषय के नाम के आधार पर सामग्री मिल जाती है। यह उपयोगकर्ताओं के लिए जानकारी की पुनः प्राप्ति को आसान बनाता है।

निष्कर्ष:

अंकन और उसकी उपयोगिता यू. डी. सी. जैसी वर्गीकरण प्रणालियों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंकन की प्रक्रिया, जानकारी के व्यवस्थित वर्गीकरण को आसान बनाती है और पुस्तकालयों, सूचना केंद्रों और डिजिटल संग्रहों के संचालन को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाती है। यू. डी. सी. में अंकन प्रणाली द्वारा विभिन्न विषयों और उपविषयों के लिए विशिष्ट संख्या आवंटित की जाती है, जिससे उपयोगकर्ता आसानी से जानकारी तक पहुँच सकते हैं। यह अंकन प्रणाली अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मानक के रूप में कार्य करती है, जिससे दुनिया भर में सामग्री का समान और व्यवस्थित वर्गीकरण किया जा सकता है।

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